bewafa shayari in hindi

bewafa shayari in hindi

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हाथ मेरे भूल बैठे दस्तकें देने का फ़न

बंद मुझ पर जब से उस के घर का दरवाज़ा हुआ


वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया

बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता


उस के यूँ तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई

जी नहीं ये मानता वो बेवफ़ा पहले से था

 

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा

मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा


चुनती हैं मेरे अश्क रुतों की भिकारनें

‘मोहसिन’ लुटा रहा हूँ सर-ए-आम चाँदनी

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